Wednesday, September 13, 2017

My dear : Listen to me



हम तुमसे जुदा हो जायेंगें

जाने कहाँ खो जायेंगें ।

तुम लाख पुकारोगे हमको 

पर लौटकर हम न आयेंगें ।

तब याद तुम्हें हम आयेंगें
पर लौट कर हम ना आयेंगें ।
हर रोज ये रिश्त़ा छूटेगा
दिल इतना ज्यादा टूटेगा ।

फिर कोई ना हमसे रूठेगा
जब हम ना आँखें खोलेंगें ।
फिर तुमसे कभी ना बोलेंगें
पर लौट कर हम ना आयेंगें ।

आखिर उस दिन तुम रो दोगें
ऐ दोस्त तुम मुझे खो दोगें ।

Monday, September 11, 2017

It takes times


समय तो लगता है 

शिखर पे जाने में
घडा़ बनाने में
परिपक्वता लाने में

नयी खोज करने में
मूल्यता दिलाने में
गिरे हुए पत्थर को
मूर्ति बनाने में

समय तो लगता है
शिखर पे जाने में
होना निराश कभी
प्राणी तू जग में

क्योकि समय तो लगता है
समय बदलने में
बंजर धरती में
फसल उगाने में

समय तो लगता है

शिखर पे जाने में ।

Wednesday, September 6, 2017

क्या लिखूँ....???

क्या लिखूँ ?

मन की कहानी लिखूंँ

या आँखों का पानी लिखूंँ

क्या लिखूंँ  ?


तितलियों का शरमाना लिखूंँ

या भँवरो का गुनगुनाना लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


हवाओं की झनकार लिखूंँ

या कोयल के गीत सदाबहार लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


बादलो में चाँद का छिप जाना लिखूंँ

या सूरज का हर रोज मुस्कुराना लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


धरती का श्रृंगार लिखूंँ

या बूंदों का उपहार लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


फूलों की महक लिखूंँ

या पत्तों की खनक लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?