Thursday, June 22, 2017

वो दिन जो बीत गए ..!!

बीते दौर में गुजरे वो पल---

नए दौर की इस दुनिया के
रस्मों रिवाज अनोखे है ।
जिनको कभी ना सोचा करते 
वो आयाम सामने है ।
फिर भी कितने मग्न हो
उन्हें निभाते जाते  है ।
       
               काश वो बीते दिन जो लौटे
               उन्हें याद कर फिर सोचे
               पर ऐसा जो  हो  जाए तो 
               हम  भी उनमें खो जाए 
               एक बार लिए ही जो वो 

               काश जो वापस आ जाए ---




होगा जो सौभाग्य ही मेरा 
उन पल में लौट आऊँ
पर लगता है उस क्षण के 
लिए एक छोटा ऋण भी 
चुकाना है ।
तभी वो हासिल हो सकते हैं
ये तो सच है ।
सच ही नहीं बिल्कुल सच है ।

Monday, June 5, 2017

यादों के झरोखों से

मैं ढूंढता हूं जिसे वह जहां नहीं मिलता ,
नई जमीन नया आसमान नहीं मिलता ।

खड़ा हूं मैं कब से चेहरों के एक उपवन में ,
तुम्हारे चेहरे का यहाँ कुछ भी नहीं मिलता ।

नई जमीन नया आसमान भी मिल जाए ,
अपनों का यहाँ कहीं कुछ निशां नहीं मिलता ।

मगर हमें भी हैं यकीन तुमको ढूंढ पाने का ,
चाहें कुछ भी हो पाकर ही मुझे चैन मिलता ।