Wednesday, May 3, 2017

समर्पित


मेरे एक मित्र ने  मुझको फोन किया और कहा कि 
यह मेरा नया नंबर है, कृपया इसे सेव कर लेना।

मैनें जब इस बारे जबाब दिया तो उसने कहा 
कि आपके जबाब से मेरी आँखों से आँसू निकल आए ।

मैनें कहा कि तेरी आवाज़ मैंने सेव कर रखी है। 
नंबर तुम चाहे कितने भी बदल लो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। 
मैं तुझे तेरी आवाज़ से ही पहचान लूंगा।

मैनें कहा कि मुझे तुम्हारी ये बातें सुनकर 
 हरिवंश राय बच्चनजी की बहुत ही सुन्दर कविता याद आ रही है....

"अगर बिकी तेरी दोस्ती तो पहले खरीददार हम होंगे।
तुझे ख़बर ना होगी तेरी कीमत, पर तुझे पाकर सबसे अमीर हम होंगे॥

"दोस्त साथ हों तो रोने में भी शान है।
दोस्त ना हो तो महफिल में भी श्मशान है॥"

"सारा खेल दोस्ती का हे ए मेरे दोस्त वरना..
जनाजा और बारात दोनों ही एक ही समान है।


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