" मत पूछ इस जिंदगी में "
मैंने बेगाने होते लोग देखे
अजनबी होता शहर देखा
हर इंसान को यहाँ,
मैंने खुद से ही बेखबर देखा।
रोते हुए नयन देखे,
मुस्कुराता हुआ अधर देखा
गैरों के हाथों में मरहम,
अपनों के हाथों में खंजर देखा।
मत पूछ इस जिंदगी में,
इन आँखों ने क्या मंजर देखा
मैंने हर इंसान को यहाँ,
बस खुद से ही बेखबर देखा।

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