Saturday, August 26, 2017

Rain Greenery - बरसात की हरियाली

बरसात की हरियाली

गर्मियों की शामें
और जाड़ो की गुनगुनाती धूप
मुझे मायूस करते हैं ....।

मैं कुछ खो सा जाता हूँ
फिर....


कभी तेरे ख्यालात
और कभी मेरे जज़्बात
हावी होते जाते हैं ....।

फिर एक सावन आता है
सब कुछ बह सा जाता है
मुझे महसूस होता है ....।

अगर मैं हूँ तो फिर क्यूँ हूँ
मन जाने क्या क्या कहता है
पर दर्द अनसुना सा रहता है ....।

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