Saturday, February 3, 2018

Inspiration Message

Raja Harishchandra was a very big demon. His particular point was that when he went ahead to donate his hands, his eyes would have bowed down.
          
This thing seemed strange to everyone how these kings are charitable. They also offer donations and they also get shamed. 

When this matter reached Tulsidasji, he sent the four lines to the king in which he wrote 

ऐसी देनी देन जु
               कित सीखे हो सेन।
ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ
                त्यों त्यों नीचे नैन।।

It meant that from where did you get such a donation from the king? As your hands rise up, why are your eyes bowing down to your eyes? 

 The answer that was answered in response to the king was so strange that the king who became the king was convinced. 
 No one has given such a lovely answer to anyone.

 King wrote in reply  -

देनहार कोई और है
                भेजत जो दिन रैन।
लोग भरम हम पर करैं
                   तासौं नीचे नैन।।

 Message - 

I mean, someone who gives it is the owner. He is a divine, he is sending day and night. But people think that I am giving the King is giving. By thinking of this I am shamed and my eyes bow down. 
 He does it and he does it only, why do you keep it sweet? 

 वो ही करता और वो ही करवाता है,
            फिर भी बंदे तू इतना इतराता है..!

एक साँस भी नही है तेरे बस की,
          वो ही सुलाता और वो ही जगाता है..!



Sunday, October 29, 2017

Do not ask in this life

" मत पूछ इस जिंदगी में " 


मैंने बेगाने होते लोग देखे 
अजनबी होता शहर देखा 

हर इंसान को यहाँ, 
मैंने खुद से ही बेखबर देखा। 

रोते हुए नयन देखे, 
मुस्कुराता हुआ अधर देखा 


गैरों के हाथों में मरहम, 
अपनों के हाथों में खंजर देखा। 

मत पूछ इस जिंदगी में, 
इन आँखों ने क्या मंजर देखा 

मैंने हर इंसान को यहाँ, 
बस खुद से ही बेखबर देखा।

Wednesday, September 13, 2017

My dear : Listen to me



हम तुमसे जुदा हो जायेंगें

जाने कहाँ खो जायेंगें ।

तुम लाख पुकारोगे हमको 

पर लौटकर हम न आयेंगें ।

तब याद तुम्हें हम आयेंगें
पर लौट कर हम ना आयेंगें ।
हर रोज ये रिश्त़ा छूटेगा
दिल इतना ज्यादा टूटेगा ।

फिर कोई ना हमसे रूठेगा
जब हम ना आँखें खोलेंगें ।
फिर तुमसे कभी ना बोलेंगें
पर लौट कर हम ना आयेंगें ।

आखिर उस दिन तुम रो दोगें
ऐ दोस्त तुम मुझे खो दोगें ।

Monday, September 11, 2017

It takes times


समय तो लगता है 

शिखर पे जाने में
घडा़ बनाने में
परिपक्वता लाने में

नयी खोज करने में
मूल्यता दिलाने में
गिरे हुए पत्थर को
मूर्ति बनाने में

समय तो लगता है
शिखर पे जाने में
होना निराश कभी
प्राणी तू जग में

क्योकि समय तो लगता है
समय बदलने में
बंजर धरती में
फसल उगाने में

समय तो लगता है

शिखर पे जाने में ।

Wednesday, September 6, 2017

क्या लिखूँ....???

क्या लिखूँ ?

मन की कहानी लिखूंँ

या आँखों का पानी लिखूंँ

क्या लिखूंँ  ?


तितलियों का शरमाना लिखूंँ

या भँवरो का गुनगुनाना लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


हवाओं की झनकार लिखूंँ

या कोयल के गीत सदाबहार लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


बादलो में चाँद का छिप जाना लिखूंँ

या सूरज का हर रोज मुस्कुराना लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


धरती का श्रृंगार लिखूंँ

या बूंदों का उपहार लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?


फूलों की महक लिखूंँ

या पत्तों की खनक लिखूंँ

क्या लिखूंँ   ?

Saturday, August 26, 2017

Rain Greenery - बरसात की हरियाली

बरसात की हरियाली

गर्मियों की शामें
और जाड़ो की गुनगुनाती धूप
मुझे मायूस करते हैं ....।

मैं कुछ खो सा जाता हूँ
फिर....


कभी तेरे ख्यालात
और कभी मेरे जज़्बात
हावी होते जाते हैं ....।

फिर एक सावन आता है
सब कुछ बह सा जाता है
मुझे महसूस होता है ....।

अगर मैं हूँ तो फिर क्यूँ हूँ
मन जाने क्या क्या कहता है
पर दर्द अनसुना सा रहता है ....।

Thursday, August 24, 2017

Just Like That

उलझने हैं बहुत

सुलझा लिया करता हूँ,
फोटो खिंचवाते वक़्त मैं अक्सर
मुस्कुरा लिया करता हूँ.....


क्यूँ नुमाइश करूँ
मैं अपने माथे पर शिकन की,
मैं अक्सर मुस्कुरा के इन्हें
मिटा दिया करता हूँ.....

क्योंकि.....


जब लड़ना है खुद को
खुद ही से तो हार-जीत में
कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ.....

हारु या जीतू कोई रंज नहीं
कभी खुद को जिता देताहूँ
कभी खुद से जीत जाता हूँ.....

Wednesday, August 23, 2017

सूरत बदलनी चाहिए

हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए​।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी​,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए​।

हर सड़क पर हर गली में हर नगर हर गाँव में​,
हाथ लहराते हुए हर शाम चलनी चाहिए​।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं​,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए​।

​मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही​,
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए ।

Tuesday, August 22, 2017

Remembers of Child hood



What childhood were my days
Do not worry..no pain no one
Just eat, eat, sleep
Just miss it

When afraid of papa
He saw them from a distance
Why did that day kill me
Do not miss the story of that day

How many tales were grandmothers?
With the hands of food grandmother
Millions of tantrums ... how angry
Do not remember that condition

When many children in the courtyard
Was in the noisy courtyard
Screaming mother was scolded
Do not miss that scold

Used to fight a little thing
Fall on the swings
There are still no injuries.
But I do not remember that injury

Do not miss the story of childhood
Do not miss things old
I have an idea of ​​mother's love
But she does not remember sleeping sorrow

Monday, August 21, 2017

एक उड़ान - मेरी

सपनों की है एक दुनिया
इसे हकीकत बनाना है
ये हौंसलों की उड़ानें हैं।

आँखों में हैं ख्वाब कई
हकीकत में सजाने हैं
कोई साथी न हो अगर राहो में,
अकेले ही  मुझे फासले मिटाने हैं।

फूलों की तो ख्वाहिश है
तो काँटों से भी डरना क्यूँ
हर एक मुश्किल से
मुझे आगे को बढ़ना है

सपनों की है एक दुनिया
इसे हकीकत बनाना है
ये हौंसलों की उड़ानें हैं  ।

Sunday, August 6, 2017

My Untold Aspect


Kisi ka saath pana bhi
Kabhi aasan nhi hota

Kisi ke door jaane se 
Dil veeran nhi hota

Wajah kuchh or bhi mil jaati hai
Duniya me jeene ki

Kisi ki aas par jeena bhi to
Aasan nhi hota

Nasibo me hi na likha ho to 
Wo kaise mil jaaye

Khuda bhi rooth jaaye to
Kya kare.

Saturday, August 5, 2017

यकीन करो...!!!


इस उम्मीद से मत रहो,
कि तुम्हें कोई उठा लेगा 

सोच कर मत डूबो दरिया में,
कि तुम्हें कोई बचा लेगा...!!

ये दुनिया तो एक अड्डा है,
तमाशबीनों का

अगर देखा तुम्हें मुसीबत में तो
यहां हर कोई मज़ा लेगा...!!

Thursday, June 22, 2017

वो दिन जो बीत गए ..!!

बीते दौर में गुजरे वो पल---

नए दौर की इस दुनिया के
रस्मों रिवाज अनोखे है ।
जिनको कभी ना सोचा करते 
वो आयाम सामने है ।
फिर भी कितने मग्न हो
उन्हें निभाते जाते  है ।
       
               काश वो बीते दिन जो लौटे
               उन्हें याद कर फिर सोचे
               पर ऐसा जो  हो  जाए तो 
               हम  भी उनमें खो जाए 
               एक बार लिए ही जो वो 

               काश जो वापस आ जाए ---




होगा जो सौभाग्य ही मेरा 
उन पल में लौट आऊँ
पर लगता है उस क्षण के 
लिए एक छोटा ऋण भी 
चुकाना है ।
तभी वो हासिल हो सकते हैं
ये तो सच है ।
सच ही नहीं बिल्कुल सच है ।

Monday, June 5, 2017

यादों के झरोखों से

मैं ढूंढता हूं जिसे वह जहां नहीं मिलता ,
नई जमीन नया आसमान नहीं मिलता ।

खड़ा हूं मैं कब से चेहरों के एक उपवन में ,
तुम्हारे चेहरे का यहाँ कुछ भी नहीं मिलता ।

नई जमीन नया आसमान भी मिल जाए ,
अपनों का यहाँ कहीं कुछ निशां नहीं मिलता ।

मगर हमें भी हैं यकीन तुमको ढूंढ पाने का ,
चाहें कुछ भी हो पाकर ही मुझे चैन मिलता ।



Monday, May 15, 2017

Knows you !!!

जिन्दगी एक मुस्कान है ,
दर्द की कोई पहिचान है
जिन्दगी एक महिमान है ,
छोड़ संसार जाना पड़ेगा ।   
    

  


               जिन्दगी   प्यार  का  गीत  है ,
               इसे हर दिल को गाना पड़ेगा ,
               जिन्दगी ग़म का सागर भी है ,
               हँस के उस पार जाना पड़ेगा ।